विवेक रामास्वामी का वेंस के बारे में बयान
विख्यात कारोबारी और समाजसेवी विवेक रामास्वामी ने जेडी वेंस को 'उत्कृष्ट उपराष्ट्रपति' कहा है, यह बयान ट्रम्प द्वारा वेंस को 2024 राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने साथी के रूप में चयनित करने के बाद आया है। रामास्वामी ने वेंस को बधाई दी और उनके साथ मिलकर आने वाले समय में कार्य करने के प्रति अपने उत्साह को प्रकट किया। इस बात के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है, क्योंकि वेंस की छवि में पहले के दिनों में ट्रम्प के आलोचक के रूप में जानी जाती थी।
डोनाल्ड ट्रम्प की घोषणा और वेंस का चयन
डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार, 15 जुलाई को मिल्वौकी में अपने साथी के रूप में जेडी वेंस का नाम घोषित किया। कुछ ही घंटों के अंतराल में वेंस को रिपब्लिकन पार्टी की औपचारिक उम्मीदवार के रूप में चुना गया। 39 वर्षीय वेंस, जो अपनी 2016 की किताब 'हिलबिली एलेगी' के माध्यम से प्रसिद्धि हासिल कर चुके हैं, 2022 में सीनेट के लिए निर्वाचित हुए थे।
वेंस का ट्रम्प के प्रति बदला दृष्टिकोण
जहां पहले वेंस ट्रम्प के बावजूद खुल कर आलोचना करते थे, वहां अब वे उनके प्रबल समर्थक बन गए हैं। ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ एजेण्डा के साथ जुड़कर, वेंस ने विदेशी नीति, व्यापार और आव्रजन जैसे मुद्दों पर ट्रम्प के साथ अपनी संरेखण व्यक्त की है। वेंस विशेष रूप से जनवरी 6 के कैपिटल हमले की जाँच समिति की आलोचना करते रहे हैं और उस समय के वाइस प्रेसिडेंट माइक पेंस की सुरक्षा को लेकर शक व्यक्त किया है।
राजनीतिक परिदृश्य में वेंस की नई भूमिका
वेंस के इस चयन से राजनीति में नई बहस छिड़ गयी है। एक समय ट्रम्प के आलोचक से अब उनके निकटतम सहयोगियों में शुमार होने के कारण, वेंस की यह यात्रा काफी दिलचस्प हो गई है। उनके समर्थक इसे एक सकारात्मक दिशा में एक बड़ा बदलाव मानते हैं, जबकि उनके विरोधियों का मानना है कि यह केवल सत्ता और पद पाने की लालसा है।
इसी के साथ आगामी 2024 के चुनावों में वेंस की नई भूमिका कैसे रंग लाएगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। ट्रम्प के साथ वेंस के विचारों की समानता और उनकी पुस्तक 'हिलबिली एलेगी' से जनता की जागरुकता दोनों ही इन चुनावों के मुख्य बिंदु बन सकते हैं।
राजनीति में विविधता और वेंस का अनुभव
विवेक रामास्वामी जैसे प्रमुख व्यक्तित्व से समर्थन मिलने के बाद, वेंस का आत्मविश्वास और भी बढ़ गया होगा। उन्होंने सीनेट में अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं और राष्ट्रपति चुनावों में उनके अनुभव का लाभ ट्रम्प को भी मिलेगा।
विवेक रामास्वामी की भविष्य की योजनाएँ
रामास्वामी, जो खुद भी राजनीति में सक्रिय होते रहे हैं, वेंस के साथ मिलकर कई नई योजनाओं पर काम करने की योजना बना सकते हैं। उनका समर्थन वेंस के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन साबित हो सकता है और इससे ट्रम्प को भी फायदा हो सकता है।
sunil kumar
जुलाई 17, 2024 AT 21:52वेंस का ट्रम्प के प्रति रुख बदलना किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, लेकिन इसके पीछे की वास्तविक वजहें क्या हैं? उनकी पुस्तक 'हिलबिली एलेगी' में जो आम आदमी की आवाज थी, वह अब कहाँ गई? यह सिर्फ सत्ता की चाहत है या वास्तविक विचारों में बदलाव? यह सवाल अभी भी खुला है।
Mahesh Goud
जुलाई 18, 2024 AT 20:39ये सब बकवास है भाई साहब! वेंस तो एक ट्रम्प का गुलाम बन गया है, जैसे ही उसने ट्रम्प को देखा तो उसकी आत्मा बेच दी! जनवरी 6 की घटना पर जो बात कर रहा है, वो सब झूठ है, अमेरिका के राष्ट्रीय ध्वज को लेकर उसका रवैया बदल गया है, अब वो बस अपनी नौकरी बचाना चाहता है! लोगों को भ्रमित करने के लिए उसने रामास्वामी जैसे लोगों को अपना समर्थन दिलाया है, ये सब एक बड़ा धोखा है! 🤡
Ravi Roopchandsingh
जुलाई 19, 2024 AT 21:21वेंस का ट्रम्प के साथ जुड़ना कोई आम बात नहीं है, ये एक गहरा राजनीतिक खेल है। उसने अपनी पुस्तक में जो लोगों की आवाज उठाई थी, वो अब बंद हो गई। क्या आपने देखा कि वो जनवरी 6 की जाँच समिति को क्यों नापसंद करता है? वो जानता है कि अगर वो वहाँ जाता तो उसकी अपनी जुड़ाव की बात सामने आ जाती। अब वो ट्रम्प के बगल में बैठकर अपनी निष्पापता का दावा कर रहा है। ये नहीं हो सकता! 😡
dhawal agarwal
जुलाई 21, 2024 AT 02:51राजनीति में बदलाव होना तो बहुत आम बात है। वेंस का जीवन देखिए - एक छोटे शहर के लड़के ने अपनी किताब के जरिए दुनिया को छू लिया, फिर सीनेट में जाकर नई चुनौतियों का सामना किया। अब वो ट्रम्प के साथ है, शायद उसे लगता है कि अब ये वही रास्ता है जिससे वो अपनी विचारधारा को आगे बढ़ा सकता है। बदलाव को बदशगुन नहीं, बल्कि विकास का हिस्सा मानना चाहिए। हम सब बदलते रहते हैं - क्यों नहीं वो भी? 🌱
Shalini Dabhade
जुलाई 21, 2024 AT 07:57हर कोई ट्रम्प का समर्थन कर रहा है और वेंस को बहुत बड़ा नेता बता रहा है? ये बकवास है! भारत में भी ऐसे ही लोग हैं जो अपने देश के खिलाफ जाकर विदेशी नेताओं के गुलाम बन जाते हैं। वेंस की ये राजनीति भारत के लिए भी एक चेतावनी है - अगर हम भी इस तरह के लोगों को सत्ता में आने देंगे तो हमारा देश भी बर्बाद हो जाएगा! अमेरिका की राजनीति हमारे लिए नमूना नहीं है! 🇮🇳
Jothi Rajasekar
जुलाई 21, 2024 AT 13:12हर इंसान बदल सकता है, और वेंस ने अपने विचारों को बदला है। शायद उसने अब अपने अनुभव से सीख लिया है कि कैसे वास्तविक बदलाव आता है। ट्रम्प के साथ जुड़ना उसके लिए एक नई जिम्मेदारी है - अगर वो वाकई लोगों के लिए काम करना चाहता है, तो ये एक बड़ा मौका है। उम्मीद है कि वो इसे अच्छे से संभालेगा। 💪
Irigi Arun kumar
जुलाई 21, 2024 AT 15:30मुझे लगता है कि वेंस का ये फैसला बहुत सोच-समझकर लिया गया है। उनकी पुस्तक ने जो भावनाएँ जगाईं, वो अभी भी जीवित हैं। अब वो राजनीति के अंदर आकर उन्हीं भावनाओं को बदलाव देने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रम्प के साथ जुड़ना उनके लिए एक अपमान नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। वो अपने आप को एक बड़े आंदोलन का हिस्सा बनाना चाहते हैं। और रामास्वामी जैसे लोगों का समर्थन उनके लिए एक बहुत बड़ा सम्मान है। ये सिर्फ सत्ता की लालसा नहीं, बल्कि एक विचारधारा का विस्तार है।
Jeyaprakash Gopalswamy
जुलाई 23, 2024 AT 15:15अच्छा बात है कि वेंस ने अपने रास्ते को बदला। बहुत लोग अपनी गलतियों को मानने से डरते हैं, लेकिन वो ने अपने विचारों को बदला - ये बहुत बड़ी बात है। रामास्वामी जैसे लोगों का समर्थन उसके लिए एक बहुत बड़ा आधार है। उम्मीद है कि वो इस नई भूमिका में अपने आप को बेहतर तरीके से दिखाएंगे। ये सिर्फ एक राजनीतिक चलन नहीं, ये एक नई शुरुआत है। आप सब भी इसे एक नई उम्मीद के रूप में देखिए। ❤️